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पुणे पोर्श कांड : मीडिया न होती तो, पूरा सिस्टम ही बिक चुका था.....

03:39 PM May 27, 2024 IST | CNE DESK
पुणे पोर्श कांड   मीडिया न होती तो  पूरा सिस्टम ही बिक चुका था
पुणे पोर्श कांड
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CNE DESK/पुणे पोर्श कांड पर देश भर में चर्चा हो रही है। जैसे—जैसे इस केस की परतें खुलती जा रही हैं, वैसे—वैसे पता चल रहा है कि अपराधी को बचाने के लिए किस तरह रईसजादों ने पुलिस, डॉक्टर सहित पूरा सिस्टम ही खरीद लिया था। यदि ऐसे में मीडिया न होती तो महेंग पोर्श कार से दो युवाओं को कुचल कर मौत के घाट उतारने वाला एक निबंध लिखने के बाद मौज कर रहा होता और उसकी जगह जेल की सलाखों के पीछे रईसजादे का गरीब ड्राइवर होता।

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पुणे पोर्श कांड
पुणे पोर्श कांड

शुरू से अंत तक सिस्टम पर उठ रहे सवाल !

वास्तव में यह पुणे पोर्श कांड तो एक बानगी भर है। वस्तु स्थिति यही है कि अमीरजाते बड़े से बड़ा अपराध कर इस सिस्टम में साफ बच जाया करते हैं। चाहे देश के किसी भी कोने की बात क्यों न हो। यदि आज की तारीख में मीडिया न हो अपरा​धियों, प्रशासन, पुलिस और नेताओं का गठजोड़ आम जनता को कुचल कर रख देगा।

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पीड़ितों के खिलाफ सिस्टम कैसे काम करता है, यह इस कांड से पता चलता है। बता दें कि घटना के वक्त दो पुलिस अफसरों ने कंट्रोल रूम को जानकारी देना तक उचित नहीं समझा। उसके बाद एक विधायक भी सुबह-सुबह दोषी को बचाने के लिए थाने पहुंच गए। बेशर्मी कहें या मजबूरी, अस्पताल के दो चिकित्सकों ने आरोपी नाबालिग के ब्लड सैंपल ही गायब कर दिए। जिससे यह पता ही नहीं चल पाया कि घटना के वक्त आरोपी नशे में था।

रईसजादे हो तो जो चाहे वह करो !

यदि इस देश में आप किसी रईसजादे के बेटे हैं तो जो चाहे वह कर सकते हैं। ऐसा यह नाबालिग साबित करने का प्रयास कर रहा था। रईसजादे के बेटे ने बिना रजिस्ट्रेशन, बिना ड्राइविंग लाइसेंस के कार दौड़ाई और बाइक सवार दो लोगों की जान ले ली। यह तो अपराध की यह पहली शुरूआत भर थी। उसके बाद जो हुआ, उसने सरकार से लेकर जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड तक पर उंगली उठ गई।

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अपराध में पर्दा डालने को जुट गया पूरा सिस्टम

एक अपराध पर पर्दा डालने के लिए वो सब किया गया, जो किसी कानून या धर्म की किताब में नहीं लिखा है। पुलिस, विधायक, डॉक्टर और अंत में खुद आरोपी नाबालिग के पापा-दादा सब अपराध पर पर्दा डालने में जुट गए।

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संक्षेप में जानिए पूरी घटना

यह घटना 19 मई की है। पुणे का कल्याणी नगर। यहां 17 साल का नाबालिग लड़का रात करीब 3 बजे अपनी स्पोटर्स कार पोर्श दौड़ाता है। इस दौरान उसकी स्पीड बहुत तेज थी। तभी उसने बाइक सवार दो सॉफ्टवेयर इंजीनियरों (लड़का-लड़की) को टक्कर मार दी। इस हादसे में दोनों अनीश अवधिया और उसकी साथी अश्विनी कोष्टा की मौत हो गई। दोनों की उम्र मात्र 24 साल थी और वे आईटी सेक्टर में काम करते थे। भीड़ ने नाबालिग को पकड़ा। उसकी पिटाई की और पुलिस को सौंप दिया।

जांच में यह बात सामने आई कि आरोपी 12वीं क्लास के रिजल्ट का जश्न मनाने के लिए दो पबों में अपने दोस्तों के साथ शराब पीने के बाद निकले थे। आरोपी वेदांत अग्रवाल (Vedant Agarwal) के पिता विशाल अग्रवाल और दादा सुरेंद्र अग्रवाल पुणे के नामी रियल एस्टेट डेवलपर हैं। चूंकि मामला हाईप्रोफाइल था, इसलिए शुरुआत से पीड़ितों के परिवार ने सिस्टम पर सवाल उठाए।

रईस के आदेश पर खरीद लिया गया कानून

बताया जा रहा है कि इस मामले में पुलिस की भूमिका संदिग्ध रही। दुर्घटना के बाद सबसे पहले यरवदा पुलिस स्टेशन के दो अफसर घटनास्थल पर पहुंचे थे, लेकिन उन्होंने ना अफसरों को सूचना दी और ना कंट्रोल रूम को बताना जरूरी समझा। जोन-1 के डीसीपी गिल भी नाइट राउंड पर थे। उन्हें भी जानकारी नहीं दी। बाद में पुलिस ने दोनों अफसरों पर एक्शन लिया और उन्हें सस्पेंड कर दिया। इन भ्रष्ट अफसरों के नाम पुलिस निरीक्षक राहुल जगदाले और एपीआई विश्वनाथ टोडकरी हैं। आरोप है कि इन दोनों ने अपराध की देरी से रिपोर्ट की और कर्तव्य में लापरवाही बरती। आरोपी नाबालिग को मेडिकल परीक्षण के लिए भी लेकर नहीं गए।

पुलिस पर लगे कस्टडी में पिज्जा-बर्गर खिलाने के आरोप !

इस मामले में शर्मनाक पहलू यह भी रहा कि पुलिस कस्टडी में नाबालिग लड़के को पिज्जा और बर्गर खिलाने के भी आरोप लगे। हालांकि, पुणे एसपी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है, लेकिन पब्लिक अब भी आरोप से पीछे नहीं हटी है। वहीं एसपी ने कहा कि घटना के बाद कस्टडी में नाबालिग को पिज्जा और बर्गर खाने को नहीं दिया गया था। पुलिस स्टेशन में नाबालिग को किसी तरह का स्पेशल ट्रीटमेंट नहीं दिया गया था।

विधायक पर भी उठ रहे सवाल

घटना के बाद वडगांव शेरी के विधायक सुनील टिंगरे भी सुबह-सुबह यरवदा पुलिस स्टेशन पहुंचे थे। आरोप लगाया जा रहा है कि उन्होंने नाबालिग के पक्ष में जांच को प्रभावित करने की कोशिश की। इसका कारण यह है कि उन्हें रियल एस्टेट कारोबारी विशाल अग्रवाल का करीबी माना जाता है। हालांकि, टिंगरे ने पुलिस पर दबाव बनाने के आरोपों को खारिज किया है। वहीं पुणे के पुलिस कमिश्नर ने कहा है कि विधायक पुलिस स्टेशन आए थे, लेकिन इससे पुलिस कार्रवाई पर कोई असर नहीं पड़ा।

नशे में धुत्त नाबालिग आरोपी का ब्लड सैंपल हुआ गायब

शुरुआत मेडिकल रिपोर्ट में यह दावा किया गया कि आरोपी नशे की हालत में नहीं था। जबकि पब और कार के सीसीटीवी फुटेज कुछ और ही हकीकत बयां कर रहे थे। इन फुटेज में आरोपी को अपने दोस्तों के साथ शराब पार्टी करते देखा जा रहा था। खुद आरोपी नाबालिग के सामने शराब से भरा गिलास रखा था। इसके बावजूद मेडिकल रिपोर्ट ने चौंकाया तो डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ भी जांच के दायरे में आ गया। नाबालिग को सबसे पहले मेडिकल टेस्ट के लिए ससून हॉस्पिटल ले जाया गया था। इस दौरान उसके ब्लड सैंपल को ऐसे शख्स के सैंपल से बदल दिया गया, जिसने शराब का सेवन नहीं किया था। ऐसे में जांच रिपोर्ट में शराब की पुष्टि नहीं हो सकी। इससे संदेह पैदा हो गया। दोबारा ब्लड रिपोर्ट आने पर शराब की पुष्टि हुई थी। बाद में पता चला कि सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों ने नाबालिग को बचाने के लिए ब्लड सैंपल से छेड़छाड़ की थी। पुलिस ने इस मामले में फॉरेंसिंक डिपार्टमेंट के HOD समेत 2 डॉक्टरों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए लोगों की पहचान डॉ. अजय तावरे और श्रीहरि हरनोर के रूप में की गई है।

जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड पर उठे सवाल !

चूंकि यह आरोपी नाबालिग था, इसलिए उसे किशोर न्याय बोर्ड के सामने पेश किया गया। बोर्ड ने 300 शब्दों का निबंध लिखने समेत अन्य मामूली शर्तों पर उसे जमानत दे दी। जब आरोपी को महज 14 घंटे में जमानत मिली तो सिस्टम पर सवाल उठने लगे। जिसके बाद यह मामला मीडिया में लगातार उछलता रहा। फिर पुलिस ने जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के फैसले को सत्र अदालत में चुनौती दी। वहां से निर्देश दिए गए कि पहले JJ बोर्ड के समक्ष रिव्यू याचिका लगाएं। अगर संतुष्ट नहीं होते हैं तो फिर सत्र अदालत के दरवाजे खुले हैं। पुलिस का कहना था कि आरोपी के साथ नरमी बरती गई है। वो जमानत का हकदार नहीं है। उसने जो अपराध किया है, वो जघन्य है। JJ बोर्ड ने पुलिस की पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई की और आरोपी नाबालिग की जमानत रद्द कर दी। उसके बाद उसे 5 जून तक बाल सुधार गृह भेज दिया गया।

कहा गया नाबालिग नहीं चला रहा था कार

हादसे के वक्त नाबालिग कार चला रहा था, लेकिन यह बात सामने आई कि ड्राइवर गंगाधर हेरीक्रब पर अग्रवाल परिवार ने दबाव डाला कि वो अपराध अपने ऊपर ले ले। नाबालिग आरोपी के पिता ने दावा किया था कि घटना में वक्त कार को उसका ड्राइवर चला रहा था। नाबालिग बेटा बगल में बैठा था।

अग्रवाल परिवार के 03 लोग अब कानून के शिकंजे में

पुणे पुलिस ने नाबालिग आरोपी के साथ-साथ पिता विशाल के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की है। विशाल को घटना के दो दिन बाद संभाजीनगर से गिरफ्तार किया गया था। आरोपी के पिता को स्थानीय कोर्ट ने 7 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। आरोपी नाबालिग पहले ही 5 जून तक शेल्टर होम भेजा गया है। कार ड्राइवर गंगाधर को धमकाने और कैद करके रखने के आरोप में दादा सुरेंद्र अग्रवाल के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने 25 मई की सुबह सुरेंद्र अग्रवाल को भी गिरफ्तार कर लिया। उन्हें 28 मई तक पुलिस हिरासत में भेजा गया है।

कार ड्राइवर को फंसाने की रची साजिश

सुरेंद्र अग्रवाल और विशाल अग्रवाल ने नाबालिग वेदांत अग्रवाल को बचाने के लिए ड्राइवर को फंसाने की कोशिश की थी। पुलिस जांच में पता चला कि हादसे के बाद भी ड्राइवर बदलने की कोशिश की गई ताकि यह दिखाया जा सके कि नाबालिग आरोपी कार नहीं चला रहा था। इसके बाद कार चालक को अपराध अपने ऊपर लेने की धमकी देकर आरोपियों को बचाने की कोशिश भी सामने आई है। शिकायत के मुताबिक, 19 मई को ड्राइवर गंगाधर हेरीक्रब अपने घर जा रहे थे। उस वक्त सुरेंद्र अग्रवाल ने उनसे बात की. वो उसे बीएमडब्ल्यू कार में सनसिटी स्थित अपने बंगले पर ले गए। वहां सुरेंद्र अग्रवाल और विशाल अग्रवाल ने ड्राइवर गंगाधर को धमकाया। मोबाइल फोन छीनकर बंगले में खड़ा कर दिया। साथ ही उन्होंने दुर्घटना का दोष खुद लेने की धमकी भी दी। उसे वहीं कैद कर लिया। उस पर पुलिस के सामने मनमुताबिक बयान देने के लिए दबाव डाला। अगले दिन ड्राइवर की पत्नी वहां पहुंची और उसे मुक्त कराया। पुलिस का कहना था कि ड्राइवर डरा हुआ था। 23 मई को उसका बयान दर्ज किया गया। तथ्यों की पुष्टि के बाद विशाल और उसके पिता सुरेंद्र पर आईपीसी की धारा 365 (अपहरण) और 368 (गलत तरीके से छिपाना या कारावास में रखना) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस इस मामले में सोमवार को कोर्ट से विशाल की कस्टडी मांगेगी।

बोला पीड़ित परिवार, ''नाबालिग नहीं यह है मानव बम''

हादसे में जिस अनीश अवधिया की मौत हुई थी, उनके चाचा अखिलेश अवधिया ने कहा, नाबालिग पर लगाई गई जमानत की शर्तें हास्यास्पद हैं। उन्होंने लापरवाही के लिए महाराष्ट्र पुलिस की आलोचना की। उन्होंने नाबालिग को 'मानव बम' कहा। अवधिया का कहना था कि नए अधिनियम के अनुसार सजा सात साल होनी चाहिए।

सीसीटीवी फुटेज से भी छेड़छाड़

अलबत्ता मामले की जांच क्राइम ब्रांच कर रही है। शनिवार को सत्र अदालत में पुलिस ने सुरेंद्र अग्रवाल की हिरासत की मांग की। पुलिस का कहना था कि आरोपी के घर से सीसीटीवी फुटेज का डीवीआर (डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर) बरामद किया है और जांच से पता चला है कि फुटेज के साथ छेड़छाड़ की गई है। अदालत को उसके खिलाफ कोंढवा, पुणे के बंडगार्डन और महाराष्ट्र के महाबलेश्वर में पुलिस स्टेशनों में दर्ज पिछले अपराधों के बारे में भी बताया गया। इस हफ्ते की शुरुआत में एक स्थानीय नेता ने सुरेंद्र और गैंगस्टर छोटा राजन के बीच कनेक्शन का दावा किया था। पुणे पुलिस कमिश्नर ने बताया कि ड्राइवर और उसके परिवार को पुलिस सुरक्षा प्रदान की जाएगी।

ना कार का रजिस्ट्रेशन था, ना ड्राइविंग लाइसेंस

जिस पोर्श कार से एक्सीडेंट हुआ था, उसका रजिस्ट्रेशन भी नहीं कराया गया था। महाराष्ट्र ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट ने बताया कि 1,758 रुपये की फीस का भुगतान ना करने की वजह से कार का रजिस्ट्रेशन मार्च से पेंडिंग था। ये कार इलेक्ट्रिक लग्जरी स्पोर्ट्स सेडान-पोर्श टायकन थी। महाराष्ट्र परिवहन आयुक्त विवेक भीमनवार के मुताबिक, पोर्श कार को मार्च में बेंगलुरु के एक डीलर ने इंपोर्ट कराया था। उसके बाद रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी करनी थी, जिसके लिए कार को महाराष्ट्र भेजा गया था। रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी करने के लिए जब कार को पुणे आरटीओ में पेश किया गया तो पाया गया कि रजिस्ट्रेशन चार्ज का भुगतान नहीं किया गया है। आगे की प्रक्रिया पूरी करने के लिए कार मालिक को रजिस्ट्रेशन फीस जमा करने के लिए कहा गया था। हालांकि, बाद में कार को रजिस्ट्रेशन के लिए आरटीओ में पेश नहीं किया गया. इस कार की कीमत दो करोड़ रुपए है।

अब तक कितनी गिरफ्तारियां?

मामले में अब तक आरोपी नाबालिग के दादा सुरेंद्र अग्रवाल, पिता विशाल अग्रवाल और 2 डॉक्टर्स समेत कुल 9 गिरफ्तारियां हुईं हैं। इनमें कोजी रेस्टोरेंट का मालिक प्रह्लाद भूतड़ा, उसका मैनेजर सचिन काटकर, ब्लैक क्लब होटल का मैनेजर संदीप सांगले और उसका स्टाफ जयेश बोनकर और नितेश शेवानी शामिल हैं। इन सभी पर नाबालिग आरोपी को शराब परोसने का आरोप है। नाबालिग के पिता पर आरोप है कि उन्होंने यह जानते हुए भी कि बेटे को कार चलाने के लिए दे दी कि उसके पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं है।

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